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ऑक्सफ़र्ड में पढ़ने का अपना मजा है – i’m enjoying study in oxford

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जब मैं किसी को बताती हूं कि मैं हर हफ्ते सिर्फ तीन घंटे की क्लास अटेंड करती हूं, तो वे यकीन नहीं करते। उन्हें लगता है कि पूरे हफ्ते में सिर्फ तीन घंटे की क्लास लगाना काफी है, वह भी तब जब आप ऑक्सफर्ड जैसे इंस्टिट्यूशन का हिस्सा हों।

मैं अभी फिलॉसफी पढ़ रही हूं और फाइनल इयर में हूं। सबसे प्यारी बात तो यह है कि हमारे कोर्स में कोई टेक्स्ट बुक नहीं है। बाकी जगह डिग्रियां जिस तरह करवाई जाती हैं, वैसे हमारे पास कोई सिलेबस भी नहीं है। मुझे इसके लिए टॉपिक्स और रीडिंग लिस्ट मिल जाती हैं और फिर मुझसे उम्मीद की जाती है कि मैं उन पर सोचने में दिमाग खर्च करूं। इसके बाद सबके आंसर्स पर बहस होती है। हमें बताना होता है कि हमारा आंसर सबसे अच्छा कैसे है। और जितना मुश्किल यह लग रहा है, वास्तव में यह उससे भी ज्यादा मुश्किल है। लेकिन अगर देखा जाए तो यही मजेदार है। जब आप कुछ ऐसा पढ़ रहे हों जो आपको पसंद है, तो कुछ भी मुश्किल नहीं होता। यहां की सबसे अच्छी बात ही यह है कि यहां सब मजे लेकर पढ़ते हैं। सब अपने कोर्स को लेकर उत्साहित हैं और हर किसी से आपको ऊर्जा मिलती है।

ऑक्सफर्ड में पढ़ना बाकी जगह पढ़ने से इसलिए भी अलग है क्योंकि यहां जैसे-जैसे साल बीतते हैं, आपको पढ़ने में और मजा आने लगता है। मैं कोलकाता में पैदा हुई और वहीं पली बढ़ी। लॉरेटा हाउस से मैंने आईसीएसईकी। इसके बाद मैं बोर्डिंग स्कूल चली गई और फिर पुणे के पास महिंद्रा युनाइटेड वर्ल्ड कॉलेज से इंटरनैशनल बैक्लॉरेट की पढ़ाई की। यहीं फिलॉसफी के बारे में मेरी दिलचस्पी पैदा हुई। फिर मैं ऐसे लोगों से घिरी हुई थी जिन्होंने पॉलिटिक्स में मेरी रुचि बढ़ाई। मुझे लगा कि मॉरैलिटी से लेकर पॉलिटिकल थियरीज पर बहस करने में और अपने विचार शेयर करने में मुझे मजा आता था। यह मेरे स्वभाव का हिस्सा बन गया था। ऐसे में जो आपका शौक बन गया हो उसी को कोर्स में पढ़ना मुश्किल नहीं लगता।

कोर्स के बारे में हटकर बात यह भी है कि आप जितना सोचते हो उससे भी ज्यादा पढ़ सकते हो। लेकिन आपको मेन फोकस दो या तीन सब्जेक्ट्स पर ही रखना होता है जिसमें आपका सबसे ज्यादा रुझान होता है। मेरी यूनिवर्सिटी की सबसे मजेदार बात यह है कि यह बहुत हैपनिंग है। यहां आप अपने टाइम का हर तरह से सदुपयोग कर सकते हो। आपको अपने जिन शौक के बारे में पता नहीं भी होता, उनके बारे में यहां आप एक्सपलोर कर लेते हैं। किकबॉक्सिंग से लेकर कुकिंग तक, सब शौक यहां पूरे किए जा सकते हैं।

एक और मजेदार बात। मेरी पढ़ाई में फिलॉसफी, पॉलिटिक्स और इकनॉमिक्स के साथ-साथ जर्नलिजम, लोगों से जुड़ी स्किल्स, टेबल मैनर और लाइफ में काम आने वाली दूसरी स्किल्स के बारे में भी पढ़ाया जाता है। स्टूडेंट्स के न्यूजपेपर के साथ काम करते हुए भी मैंने काफी टाइम बिताया है। ऑक्सफर्ड वैसे अब सीबीएसई और आईएससी से 12वीं करने वाले स्टूडेंट्स से ऐप्लिकेशंस मंगवाने की तैयारी कर रहा है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले वक्त में बहुत से और भारतीय यहां आकर पढ़ते दिखाई देंगे।

अगर आप भी यहां आने की सोच रहे हैं तो एक बात अपने दिमाग में रखनी होगी। बहुत ही ध्यान से सोचें कि आपको पढ़ना क्या है। वैसे यहां आने वाले स्टूडेंट्स के इंटरव्यू इस तरह से डिजाइन किए जाते हैं कि उन्हें वही सजेस्ट किया जाए जिसमें उनका इंटरेस्ट है। वे जो पूछते हैं, वह आपको किसी टेक्स्ट बुक में नहीं मिलेंगे। बस आपको वही बताना है जो आप सोचते हैं।

(आयशा झुनझुनवाला ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी के मेरटन कॉलेज में फिलॉसफी, पॉलिटिक्स ऐंड इकनॉमिक्स यानी पीपीई की स्टूडेंट हैं)

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