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दिल्लीवाले तो मेड को पटाकर रखते हैं! – delhiwala keeps the med!

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हाल ही में नोएडा की एक पॉश सोसायटी में घरों में काम करने वाली मेड को लेकर कॉलोनीवालों और गांववालों के बीच पत्थरबाजी हो गई। सोसायटीवालों का आरोप था कि मेड को दस हजार रुपए चुराते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया था, जिसके डर से वह घर नहीं लौटी। दूसरी ओर गांववालों का आरोप है कि उस मेड को दो दिन से घर नहीं जाने दिया जा रहा था और वह बेहोशी की हालत में मिली। बेशक, मेड को लेकर लड़ाई-झगड़े की ऐसी घटनाएं एनसीआर में भले ही होती रहती हों, लेकिन दिल्लीवालों के लिए यह बेहद अनूठी घटना है। दरअसल, दिल्लीवालों को पता है कि मेड के बिना उनका काम कतई नहीं चलेगा, इसलिए वे किसी भी हालत में मेड को पटाकर रखते हैं। फिर चाहे उन्हें मेड को कुछ एक्सट्रा सामान या पैसे देने पड़ें या फिर छुट्टी पर पैसे नहीं काटने का लालच। पीतमपुरा में रहने वाली हाउसवाइफ सुनिधि यह खबर पढ़कर हैरान है कि मालिक ने चोरी के इल्जाम में मेड को बंधक बना लिया। वह कहती हैं, ‘मैं हैरान हूं कि मालिक ने मेड को बंधक कैसे बना लिया। वरना हमारे यहां तो मेड के इतने नखरे हैं कि अगर आपने ऊंची आवाज में भी बोल दिया, तो वह तुरंत आपको नमस्ते बोलकर चली जाएगी। उसके बाद आप संभालते रहना अपने घर का काम, क्योंकि उसके सपोर्ट में कोई दूसरी कामवाली भी आपके यहां काम नहीं करेगी। इसलिए हमें तो मेड को पटाकर ही रखना पड़ता है। फिर चाहे कोई भी फॉर्म्यूला आजमाना पड़े।’

मेड को तो मनाना ही पड़ता है

वर्किंग होने की वजह से ज्यादातर दिल्लीवालियों के लिए मेड के नखरे उठाना मजबूरी है, क्योंकि उन्हें पता है कि मेड के बिना उनका काम नहीं चलने वाला। इसके लिए बाकायदा कोई छुट्टियों के पैसे नहीं काटने का फॉर्म्यूला आजमाता है, तो कोई मेड को मनपसंद गिफ्ट देता है। रोहिणी में रहने वाली सुनीता एक कंपनी में अकाउंटेंट हैं। उनको सुबह 9 बजे ऑफिस के लिए निकलना होता है। उससे पहले वह मेड की मदद से बच्चों और हसबैंड के लिए ब्रेकफास्ट और लंच तैयार करती हैं और शाम को उनके लौटने से पहले मेड डिनर तैयार कर देती है। बकौल सुनीता, ‘मेरी मेड को पता है कि नौकरी के साथ मेरा काम उसके बिना कतई नहीं चल सकता। इसका वह पूरा फायदा उठाती है। कभी मुझसे एडवांस सैलरी मांगेगी, तो बच्चों के छोटे कपड़े। कई बार तो मुझे उसे खुश करने के लिए बच्चों के एकाध बार पहने हुए कपड़े ही देने पड़ते हैं। बीती दिवाली पर उसने मुझसे मिक्सी ली थी और अगली के लिए अभी से छोटे फ्रिज की डिमांड कर दी है। लेकिन मैं भी मजबूर हूं और मेरे पास कोई दूसरा ऑप्शन नहीं है।’ वहीं द्वारका में रहने वाली मोना की तबीयत काफी खराब रहती है। इस वजह से उन्होंने घर के काम के लिए मेड रखी हुई है। बकौल मोना, ‘मेरी मेड इतनी होशियार है कि हफ्ते में तीन दिन छुट्टी जरूर करती है। और अगर टोको या पैसे काटने की बात कहो, तो उसके पास हजार बहाने तैयार रहते हैं। कभी अपनी सास के मरने का बहाना करती है, तो कभी पति की तबीयत खराब बता देती है। कभी उसका चाचा मर जाता है, तो कभी मामा। और तो और वह घर का काम ही पूरा नहीं करती, तो मैं उससे कुछ एक्सट्रा काम के लिए कैसे कहूं।’

मालकिन को कौन समझाए

जहां मालकिन मेड से परेशान रहती हैं, वहीं मेड भी मालकिन से कम परेशान नहीं रहतीं। साउथ दिल्ली की एक पॉश सोसायटी में काम करने वाली मेड गिरिजा अपनी मालकिन की आदत से बेहद परेशान रहती हैं। वह बताती हैं, ‘हमारी मालकिन बेहद लालची औरत है। वैसे तो वह कभी आपको कुछ खाने के लिए पूछेगी ही नहीं और अगर मैंने गलती से कभी कह दिया कि भाभी कुछ खाने को दे दो, तो मेरे लिए खासतौर पर दो दिन पुरानी रोटी निकाल कर लाएगी, जो कि दांतों से चबती भी नहीं। वहीं जब बात काम कराने की आती है, तो मेरे पीछे-पीछे घूमती रहेगी। मेरा सिर्फ सफाई-बरतन का काम है, लेकिन वह आए दिन मुझसे आटा मलवाती है और रोटी भी सिकवाती है, लेकिन मुझे रोटी के लिए भी नहीं पूछती। मेरे कॉलेज के पढ़ने वाले बेटे ने मुझे बताया है कि हमारे देश में कामवालियां सस्ते में मिल जाती हैं, वरना विदेशों में इन लोगों को अपने काम खुद करने पड़ते हैं।’ वहीं ईस्ट दिल्ली में मेड का काम करने वाली सोना ने बताया, ‘मेरी मालकिन कभी भी तनख्वाह टाइम पर नहीं देती और एक भी दिन छुट्टी कर लो, तो सीधे उसके पैसे काटने की बात करती है। और तो और गर्मी की छुट्टियों में जब उसके घर तमाम मेहमान आते हैं, तो दोगुना काम करवा कर भी कुछ एक्सट्रा पैसे देने में कतराती है।’ वहीं नॉर्थ दिल्ली में मेड का काम करने वाली पार्वती भी अपनी मालकिन से परेशान है। बकौल पार्वती, ‘मेरी मालकिन चाहती है कि मैं सुबह-सुबह छह बजे उसके घर आ जाऊं, ताकि वह आठ बजे अपने ऑफिस जा सके। इसके लिए मुझे साढ़े पांच बजे भूखे पेट घर से निकलना होता है। लेकिन मेरी मालकिन आठ बजे तक भी मुझे एक कप चाय देने में आनाकानी करती है।’

मेड की प्रॉब्लम

हमें सैलरी मिलती है

चाय-नाश्ता नहीं मिलता

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छुट्टी के पैसे कटते हैं

एक्सट्रा काम पर पैसे नहीं

मालकिन की प्रॉब्लम

इतनी छुट्टियां करती हैं

खाना-नाश्ता सब चाहिए

छुट्टी के पैसे नहीं कटवाती

इन्हें बड़े-बड़े गिफ्ट चाहिए

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