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CHINA

मेड इन चाइना डॉक्टर्स – mbbs course in china

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‘मेड इन चाइना’ भारत में बहुत पॉप्युलर है, चाइनीज़ प्रॉडक्ट्स भारत हर जगह छाए रहते हैं, उसी तरह ‘मेड इन चाइना’ डॉक्टर्स का ट्रेंड भी चालू हो गया है। स्टूडेंट्स की एक बड़ी संख्या एमबीबीएस करने के लिए चाइना भाग रही हैं। सवाल उठता है, क्यों?

यूरोप की तुलना में सस्ती शिक्षा और रहने के साधन की वजह से भारतीयों के लिए चीन पसंदीदा मेडिकल डिग्री डेस्टिनेशन बन गया है। चाइना के हर कॉलेज में लगभग 150 भारतीय स्टूडेंट्स को लिया जाता है। चीन में 2007 से अब मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 24 से 50 हो गयी है। यहां के कॉलेजों में भले ही इंग्लिश में पढ़ाई होती है, पर मरीज से बातचीत के लिए चाइनिश सीखना जरूरी हैं। इस वजह से एमबीबीएस कर रहे स्टूडेंट्स फ्री में चाइनिश लैंग्वेज की पढ़ाई भी कर लेते हैं।

हेल्थ मिनिस्ट्री के सूत्रों के अनुसार हर साल मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के लिए होने वाले स्क्रीनिंग टेस्ट में ज्यादातर स्टूडेंट्स चीन के मेडिकल कॉलेजों से पढ़े होते हैं। कई चीन के कई कॉलेजों में अब इस टेस्ट के हिसाब से सिलेबस और ट्रेनिंग दी जाती है। भारतीय स्टूडेंट्स का डॉक्टर बनने का सपना अब चीन के मेडिकल कॉलेज पूरा कर रहे हैं। चीन में मेडिकल की पढ़ाई ज्यादातर उन स्टूडेंट्स को आकर्षित कर रही हैं जो गवर्नमेंट एग्जाम पास नहीं कर पाते और न प्राइवेट कॉलेज की फीस भर सकते हैं।

चाइना में एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस करने की ट्यूशन फीस, खाने, रहने के साथ 15 से 20 लाख लगते हैं, पर भारत में सिर्फ ट्यूशन फीस और डोनेशन के साथ ही 45 से 75 लाख रुपये लग जाते हैं। चीन में अंतर्राष्ट्रीय स्टूडेंट्स के लिए अलग बैच लगते हैं जिसमें इंग्लिश में पढ़ाई कराई जाती है। और कम से कम 50 यूनिवर्सिटी हैं जो इंग्लिश में मेडिकल कोर्स ऑफर करती हैं। साथ ही इंडिया जहां 12वीं के बाद मेडिकल की पढ़ाई करने में नौ साल लगते हैं वहीं चाइना में सिर्फ सात साल।

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