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DELHI

‘हम अपनी मर्जी से गाते हैं राष्ट्रगान’ – & #39;we sing with our own will national anthem’

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सिनेमाघर में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाने के मामले में उस वक्त नया मोड़ आ गया, जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देशभक्ति साबित करने को सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान के दौरान खड़े होने की जरूरत नहीं है। अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि वह सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने को नियंत्रित करने के लिए नियमों में संशोधन पर विचार करे। शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि कोई राष्ट्रगान के लिए खड़ा नहीं होता, तो यह नहीं माना जा सकता कि वह कम देशभक्त है। देशभक्ति के लिए बांह में पट्टा लगाने की जरूरत नहीं है। बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट में इस सुनवाई के बाद सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने को लेकर नई बहस छिड़ गई है। तमाम लोग इसका समर्थन कर रहे हैं, तो इस तरह अपनी देशभक्ति साबित करने का विरोध करने वालों की भी कमी नहीं है।

बंटे हुए हैं सिलेब्रिटीज

सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाया जाना चाहिए या नहीं? इसे लेकर बॉलिवुड वाले भी बंटे हुए हैं। जाने-माने अभिनेता कमल हासन ने ट्वीट किया, ‘सिंगापुर में रोजाना आधी रात को वहां का राष्ट्रगान बजाया जाता है। इसी तरह हमारे यहां भी डीडी पर किया जा सकता है। लेकिन जगह-जगह पर मेरी राष्ट्रभक्ति का टेस्ट मत लीजिए और मुझ पर दबाव मत डालिए।’ वहीं सिंगर रघु राम ने भी देशभक्ति के मामले में दबाव बनाए जाने का विरोध किया है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘मैं राष्ट्रगान के दौरान खड़ा हूं, क्योंकि इससे मुझे खुशी मिलती है और मुझे उसका सम्मान करना चाहिए। लेकिन ऐसा किसी सरकारी दबाव या डर की वजह से नहीं है।’

जबकि फिल्म डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री इस पूरी बहस पर ही हैरानी जताते हैं। उन्होंने ट्वीट किया, ‘अगर मुझे सही याद है, तो 70 और 80 के दशक में सिनेमाघरों में फिल्में खत्म होने के बाद राष्ट्रगान बजाया जाता था और इसे लेकर किसी तरह का विवाद भी नहीं था। लेकिन आजकल हम हर चीज पर सवाल खड़े करते हैं, फिर चाहे वह अविवादित ही क्यों ना हो।’ जाने-माने स्क्रिप्ट राइटर जावेद अख्तर ने भी राष्ट्रगान के दौरान खड़े होने से इनकार करने वालों पर सवाल उठाया। वह कहते हैं, ‘उन लोगों के साथ वाकई सब कुछ ठीक नहीं है, जिन्हें राष्ट्रगान सुनने के बाद भीतर से कुछ नहीं होता और सम्मान का भाव नहीं आता।’ वहीं पाकिस्तानी से हिंदुस्तानी बने सिंगर अदनान सामी ने ट्वीट करके कहा, ‘सुनो, ये राष्ट्रगान है। खड़े हो जाओ। जाओ और किसी और चीज के बारे में बहस करो।’

आम लोग भी सहमत नहीं

सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने को लेकर न सिर्फ सिलेब्रिटीज बल्कि आम लोग भी बंटे हुए नजर आ रहे हैं। हमने दिल्ली के अलग-अलग सिनेमाघरों में फिल्म देखने का आए दर्शकों से इस बारे में उनकी राय जानी, तो कोई समाधान नजर नहीं आया। नई दिल्ली के एक सिनेमाघर में फिल्म देखने आए बिजनेसमैन राजीव शर्मा कहते हैं, ‘बचपन से स्कूल में हम रोजाना राष्ट्रगान गाते थे और क्रिकेट मैच से पहले भी दोनों टीमों के राष्ट्रगान बजते हैं। फिर भला किसी को सिनेमाघर में बजने वाले राष्ट्रगान से क्या प्रॉब्लम हो सकती है?’

वहीं ईस्ट दिल्ली के एक मल्टीप्लेक्स में अपने बॉयफ्रेंड के साथ फिल्म देखने आईं आईटी प्रफेशनल लवीना ने बताया, ‘मेरी समझ में नहीं आता कि अपनी देशभक्ति को साबित करने के लिए हमें अभी और क्या-क्या करना होगा। अरे भई यह देश हमारा भी है, हम भी इसे प्यार करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप कहीं भी हमारी देशभक्ति चेक करने लगोगे।’ उधर सीपी स्थित एक मल्टीप्लेक्स पर अपने दोस्तों के साथ मूवी देखने आए कॉलेज स्टूडेंट इमरान खान को सिनेमा में राष्ट्रगान गाने में कोई परहेज नहीं है। वह कहते हैं, ‘मुझे सिनेमा घर में राष्ट्रगान गाने से कोई परहेज नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि सिर्फ सिनेमाघर हीं क्यों? फिर तो आपको हर ऑफिस में सुबह की शुरुआत राष्ट्रगान से ही करनी चाहिए।’

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क्या था पुराना आदेश

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30 नवंबर 2016 को दिए आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पूरे देश में सिनेमा घरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान चलाया जाए और इस दौरान सिनेमा हॉल में मौजूद तमाम लोग खड़े होंगे। राष्ट्रगान के सम्मान में तमाम लोगों को खड़ा होना होगा। कोर्ट ने ये भी निर्देश दिया है कि जब फिल्म हॉल में राष्ट्रगान बजाया जाए, तब इस दौरान राष्ट्रीय झंडा पर्दे पर दिखाया जाए। इसके बाद से तमाम मल्टीप्लेक्स ग्रुप्स अपने यहां अलग-अलग सिंगर्स द्वारा रिकॉर्ड किए गए राष्ट्रगान बजा रहे हैं। एक सिनेमा चेन में तो खासतौर पर दिव्यांग बच्चों द्वारा रिकॉर्ड किया गया राष्ट्रगान बजाया जा रहा है।

#कोट#

ऐतराज नहीं होना चाहिए

मेरे दादा स्वतंत्रता सेनानी थे। मेरे पिताजी बताते थे कि उस वक्त कहीं पर भी लोग अचानक अपनी देशभक्ति दिखाने के लिए नारे लगाने लगते थे या देशभक्ति गीत गाने लगते थे। अब देश आजाद हो गया, लेकिन अगर मैं कहीं राष्ट्रगान के सम्मान में खड़ा होता हूं, तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि मैं दूसरे की देशभक्ति को चैलेंज कर रहा हूं और उन्हें इस पर ऐतराज भी नहीं होना चाहिए।- नोवोनील चक्रवर्ती, लेखक

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