DELHI

Delhi Govt Expert Committee Prepares Plan To Change Fate Of Najafgarh Lake – नजफगढ़ झील की बदलेगी सूरत, तैयार हुआ एनवायरमेंटल मैनेजमेंट प्लान

हाइलाइट्स:

  • दिल्ली सरकार की एक्सपर्ट कमिटी ने पांच साल का प्लान तैयार किया
  • इस झील को मैनेज और रिस्टोर करने के लिए कई तरह के कदम उठाए जाने हैं
  • प्लान में इस झील को वेटलैंड रूल 2017 के तहत नोटिफाई करना भी शामिल है
  • झील में करीब 281 पक्षियों की प्रजातिया रहती हैं, कुछ लुप्त होने की कगार पर हैं

नई दिल्ली
नजफगढ़ झील के लिए पांच साल का एनवायरमेंटल मैनेजमेंट प्लान तैयार हो गया है। एनजीटी के निर्देश पर दिल्ली सरकार की तरफ से बनाई गई एक्सपर्ट कमिटी ने इसे तैयार किया है। इस प्लान में कई काम किए जाने हैं। इनमें तुरंत उठाए जाने वाले कदमों के अलावा मीडियम और लॉन्ग टर्म प्लान भी शामिल हैं। पांच साल के दौरान दिल्ली और हरियाणा में फैली इस झील को मैनेज और रिस्टोर करने के लिए कई कदम उठाए जाने हैं।

इन कदमों में झील को वेटलैंड (कनजर्वेशन एंड मैनेजमेंट) रूल 2017 के तहत नोटिफाई करना भी शामिल है। इस नोटिफिकेशन के बाद दोनों राज्यों को अपने अपने हिस्से की झील में अतिक्रमण आदि की गतिविधियां, सीवर और कूड़ा डालने की गतिविधियां रोकने की पावर मिल जाएगी।

क्‍या-क्‍या है इस रिपोर्ट में?
नोटिफाई करने के अलावा कमिटी ने यह भी सुझाव दिया है कि झील का डीमार्केशन तुरंत किया जाना चाहिए। इसके लिए जीयो टैग पिलर का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा नजफगढ़ वेटलैंड कमिटी बनाने, हाइड्रोलॉजिकल असेसमेंट और मॉनिटरिंग सिस्टम की भी बात इस रिपोर्ट में की गई है। इस कमिटी के हेड दिल्ली के प्रिंसिपल चीफ कनजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट ईश्वर सिंह हैं। उन्होंने अपनी रिपोर्ट सीपीसीबी (सेंट्रल पल्युशन कंट्रोल बोर्ड) को सौंप दी है। गौरतलब है कि एनजीटी ने पिछले साल सितंबर में दिल्ली और हरियाणा को इस झील के एनवायरमेंट मैनेजमेंट प्लान को संयुक्त रूप से तैयार करने के लिए तीन महीने का समय दिया था।

इस पूरे प्लान के लिए सीपीसीबी नोडल एजेंसी हैं। एजेंसी से मिली जानकारी के अनुसार उन्हें दिल्ली की तरफ से प्लान मिल गया है, लेकिन हरियाणा एनवायरमेंट मैनेजमेंट प्लान अभी नहीं मिला है। इसके लिए वह राज्य सरकार को तीन रिमाइंडर भी दे चुके हैं। दिल्ली प्लान पर सीपीसीबी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इस प्लान में झील के पानी में बढ़ रहे प्रदूषण के सोर्स का पता लगाना भी शमिल है। साथ ही बजट एस्टिमेट, इस पर काम करने वाली एजेंसी, टाइमलाइन एक्शन आदि भी प्रस्तावित है।

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