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AUSTRALIA

engineers job in australia: जानें, क्यों भारतीय स्टूडेंस के लिए बढ़िया है ऑस्ट्रेलिया का एजुकेशन सिस्टम – professor mohan jacob tells why indian students are fit to work and study in australia

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ऑस्ट्रेलिया की जेम्स कुक यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ साइंस ऐंड इंजिनियरिंग के रिसर्च एजुकेशन प्रफेसर, असोसिएट डीन मोहन जैकब बताते हैं कि अलग-अलग क्षेत्रों (बिजनस, इंजिनियरिंग, हेल्थ, साइंस, सोशल साइंस, आर्ट्स) में रिसर्च के मौके बढ़ रहे हैं जिस वजह से रिसर्च स्टूडेंट्स के बीच ऑस्ट्रेलिया की काफी डिमांड है। भारतीय मूल के मोहन जैकब यहां बता रहे हैं कि इलेक्ट्रिकल, सिविल और मकैनिकल इंजिनियर्स की डिमांड हमेशा क्यों रहेगी।

वह बताते हैं कि उनके स्टूडेंट्स क्वीन्सलैंड में गलैपगस या डैनट्री रेन फॉरेस्ट में अपनी रिसर्च कर सकते हैं। कोर्स के दौरान स्टूडेंट्स अपनी रिसर्च को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त फंडिंग की मंग भी कर सकते हैं।

जैकब बताते हैं, वे ऑस्ट्रेलियन रिसर्च काउंसिल के जरिए पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च भी जारी रख सकते हैं। इसमें उनको लेक्चरर लेवल की फिक्स सैलरी भी मिलेगी। यह सैलरी करीब 90,000 ऑस्ट्रेलियन डॉलर (4329477 रुपये) है। यह एक प्रतियोगात्मक प्रक्रिया के अंतर्गत 3 साल के लिए होता है। इसके बाद वे अकैडमिक या रिसर्च से जुड़ी जॉब ढूंढ़ सकते हैं।

वह बताते हैं, सामान्य तौर पर जो भारतीय स्टूडेंट्स ऑस्ट्रेलिया में पीएचडी कंप्लीट करते हैं उन्हें पोस्ट स्टडी वीजा अप्लाई करने की सलाह दी जाती है जो कि तीन से पांच साल हो सकता है। क्योंकि ज्यादातर रिसर्च इंडस्ट्री पर फोकस्ड है तो रिसर्चर्स से उम्मीद की जाती है कि वे एप्लाई करने लायक सॉल्यूशंस दें। ऑस्ट्रेलिया में मान्यताप्राप्त इंजिनियर्स की डिमांड है क्योंकि यहां डिजिटल, मैन्युफैक्चरिंग और स्मार्ट टेक्नॉलजी बढ़ रही है। चाहे वह एग्रिकल्चर का फील्ड हो या हेल्थ का इलेक्ट्रिकल, सिविल और मकैनिकल इंजिनियर्स हमेशा डिमांड में रहेंगे क्योंकि लाइफस्टाइल तेजी से बदल रही है।

जैकब बताते हैं, भारत के स्टूडेंट्स ऑस्ट्रेलिया में बढ़िया प्रदर्शन करते हैं क्योंकि वहां अडजस्ट हो जाते हैं। थिअरिटकल एजुकेशन सिस्टम में कई साल गुजारने के बाद भारतीय स्टूडेंट्स को ऑस्ट्रेलिया का लर्निंग सिस्टम काफी भाता है। इंडस्ट्री-बेस्ड लर्निंग से उनकी प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स भी बढ़ती हैं।

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