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India procures 33% less arms in last five years, preparations to boost domestic defense industry | भारत ने पिछले पांच साल में 33% कम की हथियारों की खरीदी, घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने की तैयारी

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नई दिल्ली31 मिनट पहले

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रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने पिछले पांच साल में घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय किए हैं ताकि सैन्य साजो-सामान के आयात पर निर्भरता कम हो सके।  - Dainik Bhaskar

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने पिछले पांच साल में घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय किए हैं ताकि सैन्य साजो-सामान के आयात पर निर्भरता कम हो सके। 

भारत में 2011-15 और 2016-20 के बीच हथियारों के आयात में 33% की कमी आई है। इसका सर्वाधिक प्रभाव रूस पर पड़ा है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ओर से जारी रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने पिछले पांच साल में घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय किए हैं ताकि सैन्य साजो-सामान के आयात पर निर्भरता कम हो सके।

रूस पर पड़ा सबसे ज्यादा प्रभाव
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की आयात में कमी का सबसे ज्यादा प्रभाव रूस पर पड़ा है। हालांकि अमेरिका से भी भारत में हथियारों के आयात में 46 फीसदी की कमी आई है। सरकार घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है और 2025 तक 1.75 लाख करोड़ रुपए के रक्षा कारोबार का लक्ष्य रखा गया है। राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में रक्षा राज्यमंत्री श्रीपद नाइक ने कहा कि घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 2018-19 और 2020-21 के बीच करीब 1.99 लाख करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है।

चीन के हथियार निर्यात में भी कमी आई
रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन द्वारा हथियारों के निर्यात में 2016-20 के दौरान 7.8 फीसदी की कमी आई है। चीनी हथियारों के बड़े खरीदारों में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अल्जीरिया थे। सिपरी ने कहा कि अमेरिका हथियारों का सबसे बड़ा निर्यातक है और 2011-15 और 2016-20 के दौरान उसका हथियारों का निर्यात 32 फीसदी से बढ़कर 37 फीसदी हो गया।

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