MUMBAI

parambir singh ips: many honest ips officers in mumbai police : मुंबई पुलिस में ईमानदार अधिकारी

हाइलाइट्स:

  • सचिन वझे के मामले में पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के लेटर के बाद मचा घमासान
  • परमबीर सिंह ने गृहमंत्री अनिल देशमुख पर हर महीने 100 का कलेक्शन मांगने का लगा है आरोप
  • मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर के पत्र के बाद, मुंबई पुलिस की हो रही बदनामी
  • वहीं महाराष्ट्र और मुंबई पुलिस में कई ईमानदार अधिकारियों की होती है चर्चा

मुंबई
सचिन वझे की गिरफ्तारी के बाद वझे के तब के बॉस मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर आरोप लगाया कि देशमुख ने सचिन वझे से हर महीने 100 करोड़ रुपये का कलेक्शन करने को कहा था।

परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पिछले सप्ताह लिखे पत्र में मुंबई पुलिस की सोशल सर्विस ब्रांच के एसीपी संजय पाटील के साथ अपने कुछ वॉट्सएप चैट्स और एसएमएस को सबूत के तौर मुख्यमंत्री को भेजा और कहा कि अनिल देशमुख ने सोशल सर्विस ब्रांच को भी कलेक्शन का यह काम सौंपा था।

जो बात अब तक ऑफ रेकॉर्ड थी, परमबीर सिंह के आरोपों के बाद ऑन रेकॉर्ड हो गई, कि देश भर में पुलिस की कमाई किस तरह होती है और पुलिस की कमाई से सरकार की कमाई किस तरह होती है। लेकिन कोयले की इस कोठरी में कुछ डायमंड भी हैं। उनमे एक नाम है पूर्व अडिशनल डीजी वीवी लक्ष्मी नारायण का।

दिवाली आते ही केबिन के बाहर लगवा देते थे यह बोर्ड
वीवी लक्ष्मी नारायण, यदि एक लाइन में परिचय दिया जाए, तो चर्चित सत्यम घोटाला इन्होंने ही ओपन किया था। तब वह सीबीआई में थे। बाद में वह महाराष्ट्र पुलिस कैडर में वापस आ गए। दिवाली पर गिफ्ट देने का बहुत प्रचलन है।

पुलिस वालों को तो सबसे ज्यादा गिफ्ट भिजवाई जाती हैं। लेकिन लक्ष्मी नारायण के बारे में कहा जाता है कि वह दिवाली आने से कुछ दिनों पहले अपने केबिन के बाहर एक बोर्ड लगवा देते थे कि- ‘हमारे यहां दिवाली का गिफ्ट नहीं लिया जाता’। लक्ष्मी नारायण ने कुछ साल पहले वीआरएस ले लिया था।

क्राइम ब्रांच से अलग किया गया था समाज सेवा शाखा और फिर…
परमबीर सिंह ने उद्धव ठाकरे को लिखे पत्र में मुंबई पुलिस की जिस समाज सेवा शाखा का जिक्र किया है, उसका मूल काम मुंबई के डांस बार, रेस्तरां, होटलों में रेड डालने का है। मुंबई में ऐसे 1750 जगह हैं। यदि परमबीर सिंह के अनिल देशमुख पर आरोप सही हैं, तो इस शाखा के जरिए भी कलेक्शन की होम मिनिस्टिर की इच्छा थी।

आईपीएस वीवी लक्ष्मी नारायण, मनोज शर्मा, चेरिंग दोरजे, मीरा बोरवणकर और प्रवीण दीक्षित

आईपीएस वीवी लक्ष्मी नारायण, मनोज शर्मा, चेरिंग दोरजे, मीरा बोरवणकर और प्रवीण दीक्षित

समाज सेवा शाखा मुंबई क्राइम ब्रांच के अंडर में आती है। लेकिन कई साल पहले मुंबई के एक पुलिस कमिश्नर ने इस समाज सेवा शाखा को मुंबई क्राइम ब्रांच से अलग कर दिया था और सीधे पुलिस कमिश्नर के ऑफिस से जोड़ दिया था। जब डॉक्टर सत्यपाल सिंह मुंबई के पुलिस कमिश्नर बने, तो उन्होंने वापस समाज सेवा शाखा को मुंबई क्राइम ब्रांच से जोड़ा।

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संजय सक्सेना ने जब लगाई लगाम
लेकिन जब संजय सक्सेना मुंबई क्राइम ब्रांच चीफ बने, तो उन्होंने इस समाज सेवा शाखा के पर बुरी तरह कतर दिए। उन्होंने यहां से जुड़े करीब तीन दर्जन पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर किया था। सिर्फ तीन लोगों का स्टाफ रखा। एक सीनियर इंस्पेक्टर, एक लेडी इंस्पेक्टर और एक सिपाही। सीनियर इंस्पेक्टर को भी उन्होंने करीब 75 मेमो भी दिए थे।

संजय सक्सेना को महाराष्ट्र पुलिस के बेहद ईमानदार अधिकारियों में माना जाता है। वह अपनी क्राइम ब्रांच के सभी यूनिट्स को इस तरह मॉनिटर करते थे कि कुछ यूनिट्स में रुपयों की इतनी क्राइसिस हो गई, कि कुछ अधिकारियों ने बाहर वालों को चाय पिलानी तक बंद कर दी थी।

बंद कमरे में नहीं मिलते थे यह डीजीपी
महाराष्ट्र पुलिस में एक डीजीपी थे प्रवीण दीक्षित। वह कभी भी अपने केबिन में बाहर वालों से नहीं मिलते थे, वह विजिटर्स रूम में ही सबके सामने आकर बैठ जाते थे और सामने वाले से उसकी शिकायतें सुनते थे। क्योंकि उन्हें मालूम था कि पुलिस वालों को केबिन में अक्सर कुछ लोग ऑफर देते हैं। उनकी ईमानदारी का एक किस्सा बहुत चर्चित हुआ था।

जब डजीपी बोले, मोबाइल डेटा हो जाएगा कम
उन दिनों मॉलेस्टेशन से जुड़े किसी केस में 17 दिन में महाराष्ट्र की एक कोर्ट में फैसला आया था। एक होटल में कुछ पत्रकारों ने उनसे उस केस की बैकग्राउंड जाननी चाही, तो उन्होंने किसी एक लोकल मराठी अखबार देख लेने को कहा।

प्रवीण दीक्षित के मोबाइल में उस अखबार की उस खबर की इमेज थी, लेकिन उन्होंने यह कहकर इमेज फॉरवर्ड करने में अनिच्छा जाहिर की कि ऐसा करने से उनके मोबाइल का डेटा कम हो जाएगा। पत्रकार उनसे नाराज नहीं हुए, बल्कि अचंभित रह गए कि डीजीपी रैंक का अधिकारी अपने मोबाइल डेटा की इतनी चिंता करता है। इससे उनकी ईमानदारी झलकती है।

तेलगी कांड भी आया याद
जिस तरह से सचिन वझे प्रकरण से और परमबीर सिंह के लगाए 100 करोड़ रुपये के कलेक्शन के आरोपों से मुंबई पुलिस की छवि दागदार हुई, वैसी ही तेलगी कांड के दौरान हुई थी, जिसमे करोड़ों रुपये का स्टैंप घोटाला हुआ था।

उस वक्त पुलिस मुख्यालय में एक अधिकारी का केबिन इतना बदनाम था कि ऐसा कहा जाता है कि वहां केबिन के अंदर नोट लिए जाते थे और गिने जाते थे। बाहर केबिन का लैच उस दौरान उस अधिकारी के सिपाही द्वारा लॉक कर दिया जाता था।

रिबेरो ने इसलिए की मीरां बोरवणकर की तारीफ

जब मीरां बोरवणकर मुंबई क्राइम ब्रांच की चीफ बनी थीं, तो उन्होंने अपने केबिन का दरवाजा पूरी तरह ट्रांसपेरेंट कर दिया था। पिछले सप्ताह मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर जूलियो रिबेरो ने एक अखबार में लिखे लेख में मीरां बोरवणकर की एक कहकर बहुत तारीफ की कि उन्होंने मुंबई में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट की मोनोपोली खत्म की और सभी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट को क्राइम ब्रांच से लोकल पुलिस स्टेशन में ट्रांसफर कर दिया था।

IPS ने नहीं उठाया सांसद का कॉल
महाराष्ट्र पुलिस में एक आईपीएस अधिकारी हैं- चेरिंग दोरजे। बहुत ही ईमानदार। जब मुंबई में बांद्रा इलाके के अडिशनल सीपी थे, तब एक विवादास्पद सांसद का उनके मोबाइल पर कॉल आया। कई पत्रकार सामने ही बैठे थे। दोरजे ने कॉल रिसीव नहीं किया, बल्कि अपने सिपाही को बुलाया। कहा कि इन सांसद का अभी लैंडलाइन पर भी फोन आएगा, मुझे कॉल फॉरवर्ड न करना। कह देना, मैं मीटिंग में बिजी हूं।

कुछ ही सेकेंड में सांसद का फोन आया और सिपाही ने वही कहा, जो दोरजे ने बोला था। जब एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि उन्होंने ऐसा क्यों किया, तो दोरजे ने जवाब दिया कि मुझे मालूम है कि यह सांसद गलत काम के लिए मुझसे कहेगा और मैं यह गलत काम कर नहीं सकता।

जब गृहमंत्री ने DIG का उपन्यास गिफ्ट किया

जिन गृहमंत्री अनिल देशमुख पर परमबीर सिंह ने 100 करोड़ रुपये के कलेक्शन का आरोप लगाया, उन्होंने एक दिवाली पर कई पत्रकारों को आईपीएस अधिकारी मनोज शर्मा की जिंदगी पर केंद्रित उपन्यास ‘ट्वेल्थ फेल’ भिजवाया। लेकिन मनोज शर्मा को पिछले साल साइड पोस्टिंग पर भेज दिया।

मनोज शर्मा भी महाराष्ट्र पुलिस के ईमानदार अधिकारियों में से एक हैं। यह सबको पता है कि वह कभी भी 100 करोड़ रुपये के कलेक्शन वाले काम में शामिल नहीं हो सकते।

mumbai police officer VV Lakshmi Narayana

वीवी लक्ष्मी नारायण (फोटो क्रेडिट- मुंबई मिरर)

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