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Researchers at Princeton University in America analyze 5 million death certificates and conclude, educated lives more than uneducated | अमेरिका में प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 5 करोड़ मृत्यु प्रमाण पत्र का विश्लेषण कर निकाला निष्कर्ष

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एक घंटा पहले

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शिक्षा के हिसाब से लोगों की स्वस्थ जीवन शैली। - Dainik Bhaskar

शिक्षा के हिसाब से लोगों की स्वस्थ जीवन शैली।

  • शोधकर्ता बोले- जीवन प्रत्याशा का लिंग, नस्ल व जाति से कोई संबंध नहीं

अमेरिका में कम पढ़े लोगों की तुलना में शिक्षित 10 साल ज्यादा जीते हैं। यानी 25 साल का एक डिग्रीधारी युवा हाई स्कूल तक पढ़ाई कर छोड़ देने वाले युवा की तुलना में अधिक जीता है। अब तक यह माना जाता था कि अमीर की तुलना में गरीब कम जीते हैं, लेकिन हालिया शाेध में यह पाया गया कि जीवन प्रत्याशा का आय से नहीं बल्कि शिक्षा से संबंध है।

अमेरिका की नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस की पत्रिका में प्रिंस्टन विश्वविद्यालय की प्राे. एनी केस और प्राे. एंगस डीटन ने जीवन प्रत्याशा काे डेटा के आधार पर विश्लेषित किया है। उन्होंने 1990 से 2018 के बीच लगभग 5 कराेड़ लाेगाें के मृत्यु प्रमाण पत्र के आंकड़ों का उपयोग करते हुए सिद्ध किया है कि जीवन प्रत्याशा का शिक्षा से गहरा ताल्लुक है। लिंग, नस्ल, जातीयता काेई मायने नहीं रखते।

पुरुषों की स्थिति।

पुरुषों की स्थिति।

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शाेधकर्ताओं ने बताया कि स्नातक की डिग्री के साथ और बिना डिग्री वाले लोगों के बीच अंतर 1990 और 2000 के दशक में दिखना शुरू हाे गया। 2010 के दशक में यह अंतर और बढ़ गया, क्योंकि डिग्री धारकों की जीवन प्रत्याशा में वृद्धि जारी रही, जबकि अन्य अमेरिकियों की संख्या घटती गई।

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शाेध में यह भी पाया गया कि जैसे-जैसे मृत्यु दर में शैक्षिक अंतर बढ़ा, नस्लीय अंतराल कम होते गए। 1990 के पहले माना जाता था कि श्वेत लाेग कितना भी कम शिक्षित हाें, अश्वेताें की तुलना में ज्यादा लंबा जीवन गुजारते हैं। लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है। शोधकर्ताओं का तर्क है कि शिक्षित लोग स्वस्थ जीवन शैली विकसित करते हैं। कम पढ़े लाेग धूम्रपान और नशे का सेवन ज्यादा करते हैं और राेजगार में भी उन्हें बेहतर सेहत की गारंटी नहीं मिल पाती है।

इधर, भारत में पिछले 10 साल में जीवन प्रत्याशा बढ़ी है। मानव विकास रिपोर्ट 2020 के मुताबिक, साल 2019 में जन्मे भारतीयों की जीवन प्रत्याशा 69.7 साल आंकी गई, जबकि बांग्लादेश में 72.7 साल रही। पाकिस्तान पीछे रहा। वहां जीवन प्रत्याशा 67.3 साल आंकी गई।

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