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social media platforms: ott guidelines india : बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर और यूट्यूब, एनसीपीसीआर प्रमुख

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हाइलाइट्स:

  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से बाल अधिकार संरक्षण को प्राथमिकता देने पर जोर
  • बोले- कई दशकों में मनोरंजन के नाम पर दुष्प्रचार को समाज में घुसाने का काम
  • कानूनगो ने कहा- नए दिशानिर्देश बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए बेहतर होंगे

नई दिल्ली
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने कहा है कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर और यूट्यूब बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं हैं। इस बीच, नयी वेब सीरीज ‘बॉम्बे बेगम्स’ की स्ट्रीमिंग रोकने से जुड़े उनके निर्देश को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इसी विषय पर प्रियंक कानूनगो ने एक इंटरव्यू के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, उनके स्वरूप समेत विभिन्न पहुलओं पर बातचीत की।

बच्चों के संरक्षण के लिए कर रहे हैं काम
‘बॉम्बे बेगम्स’ की स्ट्रीमिंग रोकने पर कुछ फिल्मकारों ने रचनात्मक स्वतंत्रता पर हमला बताया है, इस पर कानूनगो ने कहा कि बच्चों के जीवन के अधिकार से ऊपर कोई अधिकार नहीं है। भारत का संविधान बच्चों को जीने का अधिकार, संरक्षण का अधिकार और विकास का अधिकार देता है। आयोग बच्चों के संरक्षण का काम कर रहा है। जो लोग ‘बॉम्बे बेगम्स’ के मुद्दे पर हमारे कदम को रचनात्मक आजादी पर हमला और राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं, वो मानसिक रूप में विकृत हैं। असल में वे समाज में भी रहने के लायक नहीं हैं।

कानूनी प्रावधान से मर्यादा में रख सकते हैं
बाल अधिकार संरक्षण के नजरिये से ओटीटी प्लेटफॉर्म नियंत्रण या कानूनी प्रावधान लागू करने की जरूरत है पर उन्होंने कहा कि हमारे पास कानूनी प्रावधान हैं जिनसे हम लोगों को मर्यादा में रख सकते हैं और बाल अधिकारों का संरक्षण करा सकते हैं। सच्चाई यह है कि पिछले कई दशकों में मनोरंजन के नाम पर दुष्प्रचार को समाज में घुसाने का काम किया गया है। अब इस पर काम करने की आवश्यकता है। इस पर नियंत्रण ही नहीं, बल्कि सकारात्मक वातावरण बनाने की दिशा में भी काम करना होगा।

अस्त्र की तरह काम करेंगे नए दिशानिर्देश
इंटरनेट मीडिया और ओटीटी को लेकर सरकार के दिशानिर्देश पर उन्होंने कहा कि इसमें शिकायत निवारण समिति की बात की गई है। उसमें महिला और बाल विकास मंत्रालय के प्रतिनिधियों को स्थान देने की बात की गई है। ये एक तरह से अस्त्र का काम करेगा और बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए बेहतर होगा।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स नहीं सुधरे तो…
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को NCPCR की तरफ से नोटिस के सवाल पर उन्होंने कहा कि हमने फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर, व्हाट्सएप और यूट्यूब् का अध्ययन किया है। इनमें से बच्चों के लिए कोई भी सुरक्षित नहीं है। हमने सबको नोटिस जारी किया है। इनको सुधारना होगा। इनको भारत के परिवेश में ढलना होगा। अगर इनको भारत में व्यवसाय करना है तो बच्चों के अधिकार के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी, अन्यथा इनको इस तरह से चलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

बाजार के हाथ में होगा कंट्रोल तो बिगड़ेगी बात
इस डिजिटल दौर में बाल अधिकार संरक्षण के संदर्भ में समाज, विशेषकर परिवार की भूमिका पर प्रियंक कानूनगो ने कहा कि देखिए, जब व्यवस्था का नियंत्रण अगर परिवार की जगह बाजार के हाथ में होगा, तो इस तरह की विकृतियां जन्म लेंगी। हमें उस दिशा में बढ़ना होगा कि व्यवस्था का नियंत्रण बाजार की जगह परिवार के हाथ में हो। इसके लिए अनुकूल माहौल बनाना होगा।

Priyank kanoongo

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