VARANASHI

strawberry farming: corona mrin gai naukari fir shuru ki kheti: कोरोना में गई नौकरी फिर शुरू की खेती

अभिषेक जायसवाल, वाराणसी
कोरोना के खौफनाक मंजर के बीच साल 2020 में 22 मार्च को पीएम मोदी के अपील के बाद जनता कर्फ्यू से देश में लॉकडाउन की शुरुआत हुई थी। कोरोना के कारण लगे इस लॉकडाउन ने कई परिवारों को गहरी चोट भी दीं। आर्थिक मंदी के कारण किसी की नौकरी पर संकट आई तो कोई अपने परिवार से दूर हो गया। ऐसे ही मुश्किलों से लड़कर आज वाराणसी के रमेश मिश्रा युवाओं के लिए मिसाल बन गए हैं।

वाराणसी के कंदवा के रहने वाले रमेश मिश्रा शहर के जाने माने स्कूल में स्पोर्ट्स कोच के साथ ही अन्य जिम्मेदार पदों पर काम कर रहे थे। लॉकडाउन के बाद स्कूल कॉलेजों पर ताला लगा तो सैलरी का संकट खड़ा हो गया। रमेश पर परिवार की जिम्मेदारी थी। सामने लॉकडाउन की परेशानी थीं। इन्ही परेशानियों के बीच रमेश ने नौकरी छोड़ खेती करने का मन बनाया।

इस बीच उन्हें उनके जानने वाले ने लीज पर जमीन दे दी। फिर रमेश ने उस जमीन पर स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। दो महीने में ही पेड़ों से स्ट्रॉबेरी के फल निकल गए। काशी की धरती से निकले स्ट्रॉबेरी बाजार में पहुंचे तो रमेश को उसकी अच्छी कीमत मिली। नौकरी में मिलने वाली सैलरी से दोगुना मुनाफा स्ट्रॉबेरी की खेती से रमेश को होने लगा।

एनबीटी ऑनलाइन से बातचीत में रमेश ने बताया कि लॉकडाउन में जब स्कूल कॉलेज बंद हो गए तो उनकी नौकरी पर भी संकट आ गया था। सैलरी भी ठीक समय पर नहीं आ रही थी। बच्चों और परिवार की जिमेदारी के कारण उन्होंने अपने जानने वाले के कहने पर खेती का मन बनाया। काशी की धरती से उन्होंने पहली बार स्ट्राबेरी का फल उगाया तो हर कोई हैरान रह गया। रमेश ने बताया कि वे और भी किसानों को इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं।

16 रुपये में मंगाए थे पौधे
रमेश ने बताया कि उन्होंने लॉकडाउन में पुणे के महाबलेश्वर से एक हजार स्ट्रॉबेरी के पौधे से इसकी शुरुआत की थी। एक पौधा 16 रुपये का पड़ा था। पूरे नौ महीने में उन्होंने अब तक इस व्यवसाय से लाखों का मुनाफा कमाया है। रमेश ने बताया कि खेती के बदले ट्रेंड से किसान अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं।

बास्केटबॉल के हैं खिलाड़ी
वाराणसी के रमेश मिश्रा यूनिवर्सिटी लेवल पर ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी बास्केटबॉल के खिलाड़ी रह चुके हैं। वे बीएचयू से पढ़ाई पूरी करने के बाद वाराणसी के जाने माने निजी स्कूल में बतौर स्पोर्ट्स कोच अपने कैरियर की शुरुआत की थी।

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