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study in Australia: ऑस्ट्रेलिया: काम के अनुभव से दाखिला आसान – know how work experience helps in getting admission in australia

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शीतल बंचरिया
अगर आपको अपने देश के अंदर अलग-अलग कामों का अनुभव है तो आपको ऑस्ट्रेलिया में आसानी से दाखिला मिल जाता है। इस बारे में कुशल सिंह ने अपना अनुभव साझा किया है। वह ऑस्ट्रेलिया की डीकिंज यूनिवर्सिटी से इन्फर्मेशन सिस्टम में मास्टर कर रहे हैं।

इन्फर्मेशन और कम्यूनिकेशन टेक्नॉलजी (आईसीटी) एक ऐसा फील्ड है जिसमें हमेशा नए अवसर पैदा होते रहते हैं। भारत में बदलते रुझानों का विश्लेषण करते हुए कुशल सिंह ने मकैनिकल से बदलकर आईटी इंजिनियरिंग में करियर बनाने को चुना। कुशल इसका श्रेय भारत में अपने काम के चार सालों के अनुभव को देते हैं। उन्होंने देश के अंदर आईटी से लेकर डिजाइन इंजिनियरिंग तक कई सेक्टरों में काम किया है। कुशल ने बताया, ‘विदेशी यूनिवर्सिटियां अंतरराष्ट्रीय छात्रों का मूल्यांकन उनके अपने देश में विभिन्न कामों में अनुभव के आधार पर करती हैं।’

कुशल ने साल 2013 में राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी (आरटीयू) से मकैनिकल इंजिनियरिंग में ग्रैजुएशन किया। उन्होंने अलग-अलग कंपनियों में ग्लोबल क्लायंट्स के लिए काम किया और अपने करियर का मार्ग बदलते हुए इसे आईटी डोमेन की ओर मोड़ना चाहा। इसके बाद उनके अंदर विदेश में पढ़ने की उत्सुकता जागी।

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साल 2015 में वह मकैनिकल इंजिनियरिंग में मास्टर की डिग्री करने के लिए कनाडा जाने वाले थे। इसीबीच उनके स्वास्थ्य के कारण उनका वीजा रिजेक्ट हो गया। फिर उन्होंने ऑस्ट्रेलिया जाकर पढ़ने की सोची। कुशल ने बताया, ‘यह एक तरह का मेरे लिए छिपा हुआ वरदान था कि मैं कनाडा नहीं गया और कार्य अनुभव हासिल करने की योजना बनाई। इसके बाद मैंने ऑस्ट्रेलिया जाने पर गौर करना शुरू किया क्योंकि वहां यूएस और यूके के मुकाबले खर्च कम था और स्थायी निवास भी हासिल करना आसान है।’

क्या है इन्फर्मेशन सिस्टम में मास्टर?
इस कोर्स से बिजनस संबंधित सिद्धांतों और इन्फर्मेशन सिस्टम की प्रैक्टिसेज एवं ई-बिजनस के लिए पर्याप्त स्किल हासिल होता है। इसमें किसी बिजनस और पॉलिसी के संदर्भ में सूचनाओं के रणनीतिक इस्तेमाल पर फोकस किया जाता है। इस कोर्स से इन्फर्मेशन सिस्टम के खास क्षेत्रों जैसे इन्फर्मेशन सिक्यॉरिटी, सप्लाई चेन मैनेजमेंट आदि में बेहतरीन तकनीकी ज्ञान और क्षमता हासिल होती है।

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भारत में जितने इन्फर्मेशन सिस्टम प्रोग्राम ऑफर किए जाते हैं उनमें से ज्यादातर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम हैं जिनमें प्रैक्टिकल की बजाय थिअरी पर ज्यादा जोर दिया जाता है। लेकिन हर कंपनी अपने कामकाज में इस तकनीक का इस्तेमाल करती है।

कुशल का मानना है कि भारत में उद्योग और शिक्षा जगत के बीच खाई है जिसकी वजह से बहुत से छात्र कुछ खास कोर्सों के लिए विदेश जाने के लिए मजबूर होते हैं। इससे लंबे समय में उनके करियर को काफी मजबूती मिलती है।

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