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upendra kushwaha news: Upendra Kushwaha ke JDU me aane per Lallan Singh ka kya hoga उपेंद्र कुशवाहा बने नीतीश के ‘छोटे भाई’, अब ‘घर के आदमी’ ललन सिंह का क्या होगा?

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पटना
पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwah) ने अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) का विलय (RLSP-JDU merger) सत्ताधारी जेडीयू में कर दिया है। इनाम स्वरूप सीएम नीतीश कुमार (Nitish kumar) ने भी उपेंद्र कुशवाहा को जेडीयू राष्ट्रीय संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा कर दी है। इस दौरान उपेंद्र कुशवाहा का जेडीयू के पटना स्थित कार्यालय में जोरदार स्वागत किया गया। RLSP का जेडीयू में विलय पर नीतीश कुमार ने खुशी जाहिर की और गर्मजोशी से उपेंद्र कुशवाहा को गुलदस्ता भेंट करके उनका जेडीयू में स्वागत किया। वहीं उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि वह नीतीश कुमार के छोटे भाई हैं। अब जब तक उनका राजनीतिक जीवन है तब तक वह बड़े भाई के साथ मिलकर काम करते रहेंगे। जेडीयू ज्वाइन करते ही इतना अहम पद मिलने पर चर्चा शुरू हो गई है कि मुंगेर से पार्टी के वरिष्ठ सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह (Lalan singh) का क्या होगा।

कुशवाहा की ज्वाइनिंग पर ललन सिंह की चर्चा क्यों?
उपेंद्र कुशवाहा ने जेडीयू ज्वाइन किया है। इसके बाद उन्हें जेडीयू संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है। ऐसे में सांसद ललन सिंह की चर्चा करने के क्या मायने हैं? दरअसल राजनीति में तभी किसी का कद बढ़ता है जब किसी का घटता है। नीतीश कुमार की पूरी राजनीतिक यात्रा पर नजर डालें तो पता चलता है कि वह अपने करियर में इस बात को कुछ ज्यादा ही फॉलो करते हैं। ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि नीतीश कुमार पर आरोप लगते रहे हैं कि उन्होंने अपने राजनीतिक अहमियत को ऊंचा बनाए रखने के लिए कभी भी किसी दूसरे नेता का कद इतना बड़ा नहीं होने दिया कि जिससे उन्हें कभी खतरा महसूस हो। ललन सिंह और उपेंद्र कुशवाहा के मामले में भी इसी बात को माना जाता रहा है। करीब एक-डेढ़ दशक पीछे जाकर बिहार की राजनीति को समझेंगे तो आप पाएंगे कि कई मौकों पर नीतीश कुमार ने ललन सिंह को आगे किया तो उपेंद्र कुशवाहा से उनके रिश्ते खराब हुए। वहीं जब ललन सिंह और नीतीश के रिश्तों में कड़वाहट की चर्चा शुरू हुई तो उपेंद्र कुशवाहा नीतीश के करीब दिखे।

JDU राष्ट्रीय संसदीय दल के अध्यक्ष बनाए गए उपेंद्र कुशवाहा

ललन सिंह और उपेंद्र कुशवाहा में है नदियों के किनारों जैसा रिश्ता!
उपेंद्र कुशवाहा को 2004 में पहली बार विधायक बनकर आने के बावजूद नीतीश कुमार ने कई वरिष्ठ विधायकों की अनदेखी करके बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष का नेता बनाया था। 2005 में बिहार में जब एनडीए की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी तो चुनाव हार चुके उपेंद्र कुशवाहा नीतीश कैबिनेट में अहम मंत्री पद चाह रहे थे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उपेंद्र कुशवाहा को मंत्री पद दिए जाने के बजाय उनसे सरकारी आवास तक छीन लिया गया। घर खाली करने में देरी हुई तो उनका सामान तक फेंक दिया गया। इसके बाद उपेंद्र कुशवाहा ने एनसीपी ज्वाइन कर लिया। वहीं इस दौरान ललन सिंह और नीतीश कुमार में काफी नजदीकियां दिखी।

2009 में नीतीश से ललन हुए दूर तो कुशवाहा आए पास!
साल 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान नीतीश कुमार और ललन सिंह के बीच दूरी की खबरें आ रही थीं। ललन सिंह तब लोकसभा में पार्टी के उपनेता थे, लेकिन जेडीयू ने उन्हें निलंबित कर दिया। इसके बाद फिर उपेंद्र कुशवाहा की नीतीश कुमार से नजदीकियां बढ़ी। कुशवाहा ने जेडीयू ज्वाइन किया था। इसके इनाम स्वरूप 2010 के विधानसभा चुनाव बाद नीतीश ने कुशवाहा को राज्यसभा भेज दिया था।

RLSP की आखिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस

ललन सिंह ने बहाए आंसू और नीतीश से दूर हो गए कुशवाहा
इसी बीच एक दुखद घटना घटी और नीतीश कुमार की मां स्वर्गीय हो गईं। श्राद्धक्रम के दौरान ललन सिंह सीएम नीतीश के आवास पर पहुंचे। दोनों नेता जब आमने-सामने हुए तो एक दूसरे से लिपट गए और आंसू बहाने लगे। इसके साथ ही एक बार फिर से कुशवाहा और नीतीश के रिश्ते खराब होने की खबरें आने लगी।

सात दिसंबर 2011 को राज्यसभा में यूपीए सरकार ने मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई की अनुमति वाला विधेयक पेश किया। बीजेपी और जेडीयू समेत एनडीए एकमत से इसके विरोध में था, लेकिन कुशवाहा ने व्हिप का उल्लंघन कर यूपीए के पक्ष में वोट कर दिया। कुशवाहा ने नीतीश कुमार को तानाशाह बताते हुए कहा कि पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र खत्म हो चुका है। उन्होंने 9 दिसंबर को पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया और तीन मार्च, 2013 को RLSP के गठन की घोषणा कर दी।

उपेंद्र कुशवाहा को एक और इनाम दे सकते हैं नीतीश कुमार

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वहीं नीतीश कुमार और ललन सिंह एक बार फिर से मुंगेर में तीन साल बाद एक मंच पर दिखे। इस मौके पर नीतीश कुमार ने कहा कि ललन सिंह घर के आदमी हैं, ऐसे में हम दोनों ज्यादा दिन अलग नहीं रह सकते हैं। 2014 के मोदी लहर में मुंगेर से लोकसभा चुनाव हार चुके ललन सिंह को MLC बनाकर नीतीश कैबिनेट में जल संसाधन मंत्री बनाया गया। 2020 के विधानसभा चुनाव में भी प्रत्याशियों के चयन से लेकर बीजेपी के साथ सीटों के बंटवारे तक की जिम्मेदारी ललन सिंह के कंधों पर ही थी।

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अब एक बार फिर से उपेंद्र कुशवाहा को जेडीयू में लाया गया है। साथ ही उन्हें जेडीयू के संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है। उन्हें यह पद सौंपने के लिए जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह से तत्काल प्रभाव से संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष पद ले लिया गया है। फिलहाल कुशवाहा चुनावी प्रक्रिया में पूरी तरह से हारे हुए नेता हैं। ऐसे में उन्हें पार्टी में इतना अहम पद देना कई राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे रहा है। खासकर ललन सिंह को लेकर भी चर्चा होना लाजिमी है कि क्या जेडीयू उन्हें संसदीय दल का नेता बनाए रखेगी या कहीं और फिट करेगी।

kushwaha+Lallan-singh

उपेंद्र कुशवाहा, नीतीश कुमार, ललन सिंह


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